Desh Bhakti Kavita

10+ देशभक्ति पर कविताएँ Desh Bhakti Kavita | Patriotic Poem

Advertisement

हेलो दोस्तों स्वागत है हमारे वेबसाइट में दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से कुछ चुनिंदा और खास देश भक्ति कविता लाये है | जी हां देशभक्ति पर हमने हमारी भावनाएं कुछ पंक्तियों के माध्यम से कागज पर उतारी हैं | यह हमारा व्यक्तिगत विचार है ,की देश के निवासी में अपने देश अपनी मातृभूमि, जन्मभूमि के लिए सम्मान, समर्पण और त्याग की भावना होना ही चाहिए |

Advertisement

हमारी रचनाओं के माध्यम से हम जनसामान्य तक यही संदेश पहुंचाने का प्रयास करते हैं; कि “मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्योछावर करने, उसके सम्मान की रक्षा करने के लिए तत्पर रहें ” | भारतवर्ष की यह परंपरा रही है और हमारे इतिहास में वर्णन है कि किस तरह हमारे वीरों ने देश के लिए अपने प्राण की आहुति दी है | इसीलिए कहा गया है “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ” जय हिंद !!! जय भारत !!!

Desh Bhakti Kavita – देशभक्ति पर कविताएँ

1. देशभक्ति कविताएँ

↜पुकार↝

करती वसुंधरा यह पुकार, वीर- सपूतों को ललकार
उठा लो शमशीरे- तलवार, ना हो देश पर वार |
गूंज उठे आसमान में, तलवारों की झनकार,
रख लो हाथों में, वीरों तुम अंगार
करती वसुंधरा यह पुकार वीर- सपूतों को ललकार||

यह परीक्षा है साहस की,
आज है जरूरत -देश से चाहत की|
कसम है तुम्हें, भारत मां के लाल,
आज दिखा दो तुम, अपना रूप विकराल
करती वसुंधरा यह पुकार वीर सपूतों को ललकार||

कर दो सुनहरे सपने साकार धर लो अपना वृहद आकार,
यह समय नहीं पीठ दिखाने का,
यह वक्त है होश में होश में आने का|
छोड़ो आपस में तकरार कर लो बंधुओं इकरार
करती वसुंधरा यह पुकार वीर सपूतों को ललकार||

ना हो धरती मां शर्मसार, कायरता है ना गवार
होगा निर्णय आर या पार |
भर लो विजय घोष हुंकार, देख के शत्रु हो “हाहाकार,”
चारों ओर देश प्रेम का हो संसार
करती वसुंधरा पुकार, वीर- सपूतों को ललकार पुकार||


2. Patriotic Poem in Hindi

आया दिन आजादी का,
सब मिलकर पर्व मनायेंगे ।
करेंगे बातें देशभक्ति की,
खुशी से तिरंगा फहरायेंगें।।

याद करेंगे महापुरुषों को,
वीरो सम्मुख दीप जलायेंगें।
लेंगे प्रण सेवा निष्ठा का,
भारत माँ की कसमें खायेंगे ।।

पर शाम ढले सैर सपाटा कर,
आनंदित अवकाश मनाएंगे।
जाकर विदेशी कम्पनियों में,
भारत का माल लुटायेंगें।।

नारेबाजी से कुछ न होगा
ज्ञान अपना देश हित में लगायेंगे ।
एक दिन की सलामी व्यर्थ है,
बापू की राह अपनायेंगे ।।

स्कैम , घोटाले अब ना होगें
भ्रष्टाचारी को सबक सिखायेंगे।
होगी सुरक्षित अब हर बेटी,
अपराधी को मार गिरायेंगे।।

सशक्त बनेगा देश हमारा,
हम विश्व विजेता कहलायेंगे।
समर्पित कर जीवन अपन,
भारत को फिर “सोने की चिड़िया” बनाएंगे ।


3. Desh Bhakti Kavita in Hindi

ये देश मेरा अलबेला है,
जहाँ रंग-बिरंगा मेला है.
उस रंग-बिरंगे मेले में
हम सबकी शान तिरंगा
मिट्टी में जो खून सजा है,
आजादी के वीरो का.
गूँज रहा है ऐसा कि वह
अनहद नाद अभंगा है..
यहाँ सबकी आन तिरंगा है,
सदियों पुरानी संस्कृति है,
नींव भी बलवान है
लेकर विरासत प्रीत की,
रोशन…ये हिन्दुस्तान है !!
है धन्य…मेरे प्यारे वतन
गुरुर है – प्रणाम है.
मेरा मान है, सन्मान है.
मेरा देश-एक अभिमान है।।


4. देश-प्रेम/देश-भक्ति कविताएँ

राष्ट्र देवता- देशभक्ति

तुझ पर निछावर फूल
केसरिया शीश फूल
ओ देवता! देश के देवता!!

तेरी हथेली उठी,
किरणें उगने लगीं,
ऋतु हो गई चंपई
दिन की साँसें जगीं,
तू ने दिया रात को
गुलाबी सुबह का पता।
ओ देवता! देश के देवता!!

फलने लगा फौलाद
मेहनत की बाँह में,
उठते हुए तूफ़ान
तेरे द्वारे थमें,
संघर्ष की गोद में
सदा से सृजन खेलता।
ओ देवता! देश के देवता!!

काल का वसंती मंत्र
पढ़ती हैं पीढ़ियाँ,
सपने सयाने हुए,
चढ़ते हैं सीढ़ियाँ
संसार बढ़ते हुए
तेरे चरण देखता।

– सोम ठाकुर


5. देशभक्ति गीत

आज़ादी का गीत- देशभक्ति

हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
चाँदी सोने हीरे मोती से सजती गुड़ियाँ।
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँ
इनसे सज धज बैठा करते जो हैं कठपुतले
हमने तोड़ अभी फेंकी हैं बेड़ी हथकड़ियाँ

परंपरा गत पुरखों की हमने जाग्रत की फिर से
उठा शीश पर रक्खा हमने हिम किरीट उज्जवल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

चाँदी सोने हीरे मोती से सजवा छाते
जो अपने सिर धरवाते थे वे अब शरमाते
फूलकली बरसाने वाली टूट गई दुनिया
वज्रों के वाहन अंबर में निर्भय घहराते

इंद्रायुध भी एक बार जो हिम्मत से ओटे
छत्र हमारा निर्मित करते साठ कोटि करतल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।

– हरिवंश राय बच्चन

Also, Check This Article:

Leave a Reply